Thursday, August 17, 2017

जीवन पथ

जीवन गति मान गति बन कर
नियति के हाथ कृति बन कर
वन उपवन में संस्कृति बन कर
रातों के औस की बूंदों में
दिन को सूरज की गर्मी में

सावन की मस्त बहारो में
पतझर के झरते पत्तो में
झरने से गिरते जलप्रपात में
जीवन अनमोल गति बनकर

चलती रहती नदियों के प्रकार में
जीवन तपकर सोने सा निखरा
कुंदन बनकर संघर्षो से
है शरद ऋतू के ठिठुरन में
जीवन कंपन के अनुभव में

जीवन गति मान गति बनकर
आया वसंत ऋतू बनकर
छायी हरियाली फूलो की
पत्तो पर कोमलता छाई
जीवन भी हरा भरा होकर

है चहक रहा इन बागों में    

Tuesday, August 15, 2017

आ अब लौट चले

भोर भई कुछ छंद लिखन को
मन बेचैन हुआ है
जीवन क्रम अब देर हुआ हैं
देर शाम हर घर में रौनक
सूबह-सवेरे सब सोते है
घर में पेर पसार

उलट-पुलट जीवन क्रम होता
जीवन संशय से भर जाता
चहल-पहल रातों को होती
सड़के सुनी सुबह-सवेरे
गर्म हुआ बाज़ार प्रपंच का

सूबह-सवेरे झूठ की चर्चा
सैर सपाटा सब होता हैं
हर ओर राजनीति गर्म हुई हैं
जागों-जागों देशवासी
प्रकृति की गोद में फिर से चले

प्रकृति की हमारी माँ है
हमारी सच्ची रक्षक हैं
हमारे जीवन को बदलने की धूरी
जिसके इर्द-गिर्द घुमती हैं साँसे
अब मैं थका हूँ तेरे गोद में
विश्राम करना चाहता हूँ
सब कुछ छोड़ कर थोडा वक्त
तुम्हारे साथ ही बिताना चाहता हूँ!!

Saturday, August 12, 2017

आज़ादी

स्वाधीनता की कलम से लिखेंगे
वीरों की गाथा की स्वर्णिम कहानी
हमें याद रखना हैं उनकी जुबानी
महज खानापूर्ति बने न कहानी
दीवानों की महफ़िल ने देदी आज़ादी
हमें मुस्कुराने के लायक बनाया
हमें सांस लेना भी खुल क सिखाया
उनकी जुदाई ने हमको रुलाया
वाही वीर गाथा है तुमको सुनानी
वीरों के यादों में महफ़िल सजाना
हमें मातृभूमि का वंदन हैं करना
तिलक मिट्टियों से लगाना हमें हैं
बढ़ाना हैं गौरव देश का
दिखाना राह बच्चों को
हर लाडले को बनना हैं सिपाही देश का
तिरंगा देश का गौरव
हमारे शान की जय हो
हम आज़ाद भारत में
आज मनाए मिलकर के आज़ादी के दिवानो की
यादों में कुछ मिलकर गाए
नमन सदा करते रहना हैं

अपने वीर जवानों को!

Wednesday, August 9, 2017

भाई की व्यथा

चन्दन रोली कुमकुम लेकर
पहुंची बहन भैया के घर
राखी का त्यौहार है आया
मन में लगी अपनों से मिलाया

बहना जब द्वारे पर आई
दरवाज़े पर ताला जड़ा था
देख बहन ठिठकी कुछ देर को
फिर चल दी वापस अपने घर

भैया आज कहाँ हो तुम
बहन द्वार से लौट रही
मेरी राखी ढूंढ रही है
आज मेरे भाई की कलाई
कैसे सुनी रह जाएगी

तभी भैया पर पड़ी नज़र तो
बहना चौक पड़ी
तुम हो यहाँ तो घर पर ताला
कौन लगा आया है

बहना मेरी न पूछो तुम
बड़ा बुरा है हाल
भाभी तेरी बांध रही है
राखी अपने भाई को
कहीं खलल ना पड़ जाए
मुझे बाहर है दिया निकाल!

Friday, August 4, 2017

मेरा प्यारा देश

मेरे प्यारे देश तुम्हे मैं कैसे नमन करूँ
किसको नमन करूँ मैं भारत किसको नमन करूँ
यह भारत केवल देश नहीं
यह शांति रथ है दुनिया का
शांति के सन्देश को लेकर
पूरी दुनिया पर राज करेगा
मेरा प्यारा देश है भारत
किसको नमन करूँ मैं भारत किसको नमन करूँ
अपने वीर सपूतो को या
कायर भ्रष्टाचारी को देश को मिटा रहे हैं जो
अपने निजी स्वार्थ में

यह स्वर्ग सी धरती
पावन धरती
भारत माँ का आँचल है
प्रेम सदभाव और भाईचारा
यह सब अपनी ताकत है
आपस में हम लड़ते रहते

लेकिन घर से बाहर
एकता के साथ चलकर
वीरता की हज़ारो गाथाएँ
इतिहास में दर्ज कराया है
अपने देश की रक्षा के खातिर
साइन पे गोली खाई है
मेरे प्यारे देश तुम्हे में कैसे नमन करूँ!

Wednesday, August 2, 2017

दिल से दिल तक

मैंने तुझको दिलदार चुना
तूने दिल का ए दर्द दिया
तुझको दिल की मलिका माना
तुने मुझको दिया गैर बना
मैं पड़ा रहता किसी कोने में
दिल का एक हिस्सा दे देते
चाहे तेरी नफरत ही सही
हिस्सेदार तेरे दिल का होता
मैं खुशनसीब मान लेता खुद को
तेरे संग जीवन की गलियों में
चाहत की रंगरलीयो में
जीवन रंगीन बना लेंगे
तेरे हाँ के संजोग तले
अपनी किस्मत अज़मा लेंगे
रात चांदनी संग-संग तेरे
खुले गगन के आँगन में
वो रंगरलीया तेरी गलियाँ
मदहोश मगन है जीवन में
जीवन सदियों में बाट दिया
खुशियाँ पल भर में बीत गई
चाहत की आहट सुनकर
पलके रातों को भींग गई
वो नींद गई संग छोड़ गई
जीवन की कड़वी सच्चाई
एक सीख बताकर चली गई
खोना पाना सब यही हुआ
अपना रोना सब छुट गया
प्रभू चरणों में जीवन छुटे
अब लगन हमे ऐसी लागी
भक्ति की ज्योत जलाकर के
तुम चली गयी, तुम चली गई
वो राह हमे दिखलाकर के

तुम चली गई, तुम चली गई!!

Wednesday, July 26, 2017

भारत माता

मोदी जी हम आपको नमन करते है
आपकी देश भक्ति को नमन करते है
आपको लेकर कुछ छन्द जेहन में आए है
उसको अपनी कलम से करबद्ध करते है

नरेन्द्र दामोदर दास मोदी
गुजरात की धरती पर जन्म हुआ इस वीर का
समझी उसने भारत माता की पीर
आज़ादी के 65 वर्ष बीत जाने के बाद भी
भारत माता अपने ही देश के
बहुरूपीए के हाथों गुलाम थी
आज़ादी के उन्मुक्त गगन में
विकास करने का जो सपना
वीरो ने देखा था
वो तोह शहीद होकर चले गए
पर भारत की बागडोर
खुदगर्जो के हाथों में सौंप दिया
पहले अंग्रेज़ छल रहे थे
अब अपना सपूत ही छल रहा है
चोरी, उत्पीड़न, बटवारा और
जाति के नाम पर देश की
अखंडता को ताड़-ताड़ कर रहे है
महानता की आड़ में
देश को गरीबी और अशिक्षा की
अंधकार में धकेल रहे है
चंद लोगो की रोटी पक रही
कभी जम्मू-कश्मीर तो कभी चाइना
के नाम पर डरा रहे है
आज एक वीर
माँ की रक्षा को आगे आया है
मोदी जी ने भारत माता की जय का नारा
गुजरात से लेकर पूरे विश्व में फैलाया है
माँ के सर को गर्व से ऊपर उठाया है
गाँधी जी तो आज़ादी पा कर भी हार गए
भारत को दो टुकड़ो में बाँट गए
गैरों के सामने कभी सर न झुकाया
पर अपनों से ही हार गए
आज भारत माँ से मेरी प्रार्थना  है
अपने इस सपूत का सर कभी न झुकने देना
यह आपका सपूत दुनिया में डंका बजाएगा

मोदी जी के सर पर अपना साया बने रखना

Tuesday, July 25, 2017

वीरो की धरती

इस वीर धरा की अवनी के
छोटे से छोटे बालक की
है भीषण हुंकार यही
हम माता के गुण गाएँगे
अपना झंडा फहराएँगे

इस वीर धरा की अवनी के
छोटे से छोटे बालक की
जन्म भूमि पर बलि चढ़ाकर
सीर ऊँचा उसका करके
जन्म दिया है जिसने
हम मात्रभूमि की रक्षा कर
कर्तव्य निभाएँगे अपना

इस वीर धरा की अवनी के
छोटे से छोटे बालक की
उद्देश्य जन्म का नहीं पैसा ओर धन है
जीवन का अंतिम लक्ष्य स्वयं जीवन है
मरना है सबको एक दिन मरना है
लेकिन उद्देश्य देश का ही गौरव बनना है

मात्र भूमि को रक्षा करते ही प्राण तजना है

Monday, July 24, 2017

ख्व़ाब

वह कहता रहा
मैं सुनती रही
ख्वाब मैं अक्सर
उसी की बुनती रही
ख्वाब में जीती रही 
मन की तड़प से बेचैन मै  
जब उससे नज़रे मिलती
मन शांत होता
ओर दिल की प्यास बुझती
मैं कितनी नासमझ थी
ख्वाब मैं बुनती रही
वक़्त बीतता गया
एक दिन अपने हाथों ही
उससे अपने आपको जुदा किया
खुद से ही गैर बता डाला
उसके दिल को झकझोर कर तोड़  डाला
क्यूंकि मेरी मुश्किल कुछ अलग थी
मैं अपने फ़र्ज़ से बंधी थी
अपना प्यार दिल में ही छुपा लिया
बड़ी ही मुश्किल से उसको मैंने
गैर तो बता दिया
अपने एहसास को
अपने दिल में ही सुला दिया
रंग जो प्यार का चढ़ा से
उसको नहला दिया
साबुन से साफ़ करके
दाग भी मिटा दिया
पर किसे पता था
आज भी मेरे दिल में
टिस सी उठती है
काश वो मेरे संग होता
मैं उसके संग होती

दोनों मिल जीवन में रंग भरते

Sunday, July 23, 2017

सैनिक

देखो गगन में आज सब कुछ डोलता सा दिख रहा है
देखो अकंटक बादलों से घिर गया है आसमा
है देश का दुश्मन खड़ा सीने पे अधम की तरह
है होसला चट्टान का जांबाज़ लेकर के खड़ा
तिरंगा लहराते रहे सर कट गया तो क्या
हो कर शहीद हम सदा इतिहास में छप जाएँगे   

देखो गगन में आज सब कुछ डोलता सा दिख रहा है
देखो समय के क्रोध से तन कापने उसका लगा
जैसे समय के वेग से सोता हुआ सागर जगा
भूचाल ला दूंगा जमी पर मेरे हाथ खोल दो
शासन कि मजबूरी में बंधा हुआ मजबूर हू
वरना पाकिस्तान क्या मेरे चरण की धूल है

देखो गगन में आज सब कुछ डोलता सा दिख रहा है
शासन भी अब कर रहा मंथन हमारे साथ है
जिसकी कोई हस्ती नहीं दहाड़ वर्षो से रहा
सब्र टूटेगा अगर उड़ जाएगा तूफ़ान में
छेर मत इस शेर को महंगा तुझे पड़ जाएगा
रह अपनी सीमा में हमेशा दामन ख़ुशी से भर दूंगा

यह देश भगत सिंह गाँधी का हर समय पड़ोसी धर्म निभाऊंगा!!

Saturday, July 22, 2017

राखी

सखी आज राखी का त्योहार आया
मन गगन में नया धूप छाया
हर ओर ख़ुशी के फूल खिले है
रंग-बिरंगे परिधानों में
सजी-सजी बहने है सारी
भाइयो को बांध राखी
दिल में फूली नही समाती
हर कठिन वक़्त में
भाई मेरा साथ देगा
दुनिया के हर गम से मुझको
वो सदा बचाएगा
हर खुसी हर गम में
हर रिस्ता अपना निभाएगा
भाई के घर में बहन
स्थान ऊचा पाएगी
राखी के इस बंधन का
वो हरदम मान बढाएगी