Monday, October 16, 2017

दिवाली

दीपों का त्योहार बड़ा है
पावन ये संसार मेरा हैं
जग का हर अंदाज़ नया है
हर घर  में पकवान नया है

दीपों का त्योहार बड़ा है
फूलझड़ियों और लड़ियों से तो
सारा अब बाज़ार अटा हैं
फ्रूट-मिठाई खेल-खिलौने
रंग-बिरंगे फूलों से
देखों अब बाज़ार सजा हैं

दीपों का त्योहार बड़ा है
रंगोली हर घर की शोभा 
हैं प्रतिक ये दीपक मेरा 
सच्चाई की जीत का 

दीपों का त्योहार बड़ा है 
दीपक से घर सजता है पर 
रौशन होता मन का कोना-कोना 
रंग -बिरंगे खिलौने पाकर 
बच्चे खुश हो जाते है 

दीपों का त्योहार बड़ा है 
ये पावन त्योहार हमारा 
ढेरों बातें सिखलाता है 
जीवन की हर कठिन घडी में 
मुस्काना सिखलाता है 

दीपों का त्योहार बड़ा है 
सत्य की जीत पर 
हर घडी हर दीप पर 
आपका अधिकार है 
मुस्कुराओ गले लगाओ 
ज़िन्दगी हँस कर बिताओं 


दिवाली की आप सबको हार्दिक बधाई 

Friday, October 13, 2017

हमराज

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
विरह-मिलन का राज़ बताना
अपना ये अंदाज़ बताना

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
दिल की धड़कन को सुनकर के
साथी का मिजाज़ बताना

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
जीवन नैया के डगमग से
सुर का नया कोई साज बनाना

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
जीवन के उलझन में अपनी
दिल का कोई तान सुनाना

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
कोमल मन निष्ठुर जीवन है
राह कठिन को सुगम बनाना
साथी का तुम साथ निभाना

ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
जीवन के संकल्प में अपने
हाथों से रंग भरकर जाना

रंग बिरंगी रंगोली सी
दीये की सी पावनता हो
चंदा सा हो सरल मधुर जो
सूरज सा हो तेज जहाँ पर
अपना घर तुम वही बनाना
ऐ मेरे हमराज बताना
दिल के कोई साज सुनाना
जीवन को संगीत बनाना!!

Monday, October 9, 2017

दिलों का फ़ासला

दिल से दिल का ये फ़ासला अब
गहरी खाई में तब्दील होता गया
कहीं पैसों ने तो कहीं जातियों का
अहम् भावना में समाता गया
आदमी-आदमी की तरफ देखने में
शरम आज भरपूर आने लगा है
शितम्गर ये दुनिया तमाशा हमारा
कहीं न कहीं तो बनाता रहेगा
ज़मीनी हक़ीकत को हम देखकर के
स्वयं को हमारी पुरानी धरा में
कभी न कभी लौट जाना पड़ेगा
मिलजुल कर गलियों में गीतों का गायन
घर की डयोढ़ी पे बीते पूरी शाम
हँसी और ठहाकों से गूंजे दिशाए
वहीँ दिन और रातों हो पावन हमारी
सभी मिलके बाटे जो खुशियाँ हमारी
दिल से दिल की न दुरी कभी भी बने
खुशियों की सौगात हर घर में  हो.

Sunday, October 8, 2017

भाभी ननद संवाद

भउजी खोल दियउ गठरी अपन हे
अखन राखी के अयलै त्यौहार हे
ननदी मांगये नेग अपन हे
भउजी खोल दियउ गठरी अपन हे

भैया तकैत छथ मुहवा अहि के
कनि हँस दिऔ खुल के एखन हे
नेक देख लिए अपन अहा सब
भैया देलन ह कथी दिल खोल के

भउजी खोल दियउ गठरी अपन हे
अएलै साल भर पर राखी हमर हे
इंहा आबे ला कईली ह केतना जतन हे
जइबै ससुरा जखने तखन हे
सांस पूछ तन देखाबा त नेग अपन हे
भाई देलको ह नेग केहन हे

भउजी खोल दियउ गठरी अपन हे
सांसु खोलथिन जे गठरी हमर हे
खुश होइथिन नेग देखके हमर हे
भउजी होयत नाम अही के ऊपर हे
भउजी खोल दियउ गठरी अपन हे

Friday, October 6, 2017

यादें

सूनी-सूनी अखियों में
भीगी-भीगी रतियों में
सूनी-सूनी गलियों में
दिल रोये मेरा तुम बिन
घर की दीवारों में
गम की अहातों से
मुँह जो चिढ़ाए मुझे
बतिया सुनाए मुझे
तानों की बातों से
नैन भिगोए मेरे
यादों की बातों ने
सूनी-सूनी अखियों में

भीगी-भीगी रतियों में 

Wednesday, October 4, 2017

साईं राम

गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो
राधा रमन हरी गोविन्द बोलो
गोविन्द जय जय गोपाल जय जय
साईं राम जय जय राम नाम जय जय
कैलाश वासी शिव-शंकर जय जय

गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो
राधा रमन हरी गोविन्द बोलो
सुबहो सवेरे साईं नाम बोलो
शिरडी साई बोलो सत्य साई बोलो

राधा रमन हरी गोविन्द बोलो
सीता राम बोलो राम-राम बोलो
साई राम जय जय राम नाम जय जय
कैलाश वासी शिव-शंकर जय जय.

Tuesday, October 3, 2017

माँ भारती

भारत माता ग्राम वासिनी 
पत्थर की प्रतिमा निवासिनी 
गौरव गाथा मय प्रवासिनी 
सर पर मुकुट हाथ में ध्वज 
वीरों का नमन स्वीकार कर 

भारत माता ग्राम वासिनी 
पत्थर पर भी फसल उगाकर 
हरित क्रान्ति का सृजन किया है 
माँ का आँचल हरियाली से भर कर 
प्रातः प्रशस्त कर दिया देश का 

भारत माता ग्राम वासिनी 
पत्थर की प्रतिमा निवासिनी 
उज्जवल भविष्य का मार्ग 
प्रशस्त किया है 
हर मेह्नत कश हम वीर पूज 
माता का गौरव बनकर के 
घर जाएंगे हम विश्व पहल कर 

भारत माता ग्राम वासिनी 
पत्थर की महिमा निवासिनी!!

Saturday, September 9, 2017

ख्वाब

चाहे हकीकत हो या ख्वाब
बस हो वो लाजवाब
किसी के दिल में क्या छुपा है
सब हो जाए बेनकाब तो
तो मंजर होगा लाजवाब
मैं अच्छी हूँ पर
दुनिया के नज़र में हमेशा बुरी हूँ
अगर मैं सच में बुरी होती तो
रिश्तों की परिभाषा ही अलग होती

चाहे हकीकत हो या ख्वाब
बस हो वो लाजवाब
जीवन एक सफ़र है
ओर हम सब उसके मुसाफ़िर
चिड़ियों के कलरव ध्वनि से भोड़ के
मधुर भजन के स्वर से हो हर शाम
ज़िन्दगी मुश्किलों का अंबार ही क्यों न हो

ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत
सामने मेरे आओ
जीवन की इन रंग रलियों में
कुछ तो रंग भर जाओ
कोई जीए हज़ारों साल

हम क्षण में हैं मालामाल!!

Friday, September 8, 2017

जीवन दान

सामने डूबती सांसो का ऐसा मंजर था
ख्वाबो में सब अपना था
पर हकीकत में सब सपना था
चंद लम्हे कट जाए तो गनीमत हो
पर इस विकट  घडी में किसी ने अपना कहने की
हिम्मत जुटाया था तो वो थे
वो थे हमारी मुकिल की घडी में
हमारा साथ देने वाले वो भाई
कर्जदारों ने हमें अपना कहने का साहस जुटाया
बड़ी मुश्किल से खुदा से
हमारी जिन्दगी के लिए चंद लम्हे
देने की गुजारिश की
हुजुर बन्दे को कुछ वक्त दे दीजिये
और कुछ न सही
हमारा कर्जा ही उतार लेगा
जिंदगी ने इसे कुछ तो दिया नहीं
शायद मौत ही इसे अपना ले
पर आपसे विनती है सरकार
आप इतने निष्ठुर न बन जाइये
ये तो एक इमानदार आदमी है
घपलेबाजों पर आप तो कई बार तरस खातें है
इस पर एक बार की मेहरबानी तो दिखाइए
जिंदगी जीने में न सही
मरने में ही इसे अमरत्व दे दीजिये !!

Thursday, September 7, 2017

घर

सोचा था मैं एक सुन्दर सा घर बनूंगी
जिसमे शांति सुकून और प्यार
सब साथ-साथ रहेंगे
लेकिन क्या पता था
वक़्त को कुछ ओर ही मंजूर है
ज़िन्दगी तिनके जड़ने में ही निकल जाएगी
वक़्त बातो बातो में ऐसे गुज़र जाएगा
शांति, सुकून और प्यार मेरे लिए सपना बन जाएगा
घर अपना तो न बना सके
पर मलाल इस बात का रहा
कि घर गैर का ही सही
ज़िन्दगी तो सुकून से बिता लेते
खुदा की इतनी इबादत भी
हमे कम से कम मिल जाती
शुक्रिया दिल से उनको करके
हम इस जहाँ से निकल लेते
खुदे ने हमे इस काबिल भी न समझा


Tuesday, September 5, 2017

एक कदम

बस एक कदम तुम ओर चलो
मंजिल के पास खड़े हो
थोड़ी हिम्मत और साहस से
तुम लक्ष्य भेद सकते हो

यह लक्ष्य हमारा मृगमरीचिका बनकर क्यों आया है
बरसों से है कदम हमारे एक ताल पर चलते
फिर भी मेरा लक्ष्य आज तक
नज़र मुझे नही आया

हर कोशिश बेकार हुई
हर लक्ष्य हमारा छूटा
मेहनतकस और खुद्दारी का
दंभ हमारा टूटा

मन के कोनों में बैठी है
रूह कापती मेरी
क्या ये मेरा जीवन मुझको
ठोकर ही मारेगा

कभी ख़ुशी की दो बूंद से
मेरा मिलन न होगा
सत्य तड़पता रह जाएगा
झूठा मौज मनाएगा
रात अंधेरा छाया ऐसा

शायद दिन नहीं आएगा

Friday, September 1, 2017

सपना

रिम झिम बरसता सावन होगा
झिल मिल सितारों का आँगन होगा
खुशियों की तारों की बारात होगी
हाथों में मेहँदी सजी आज होगी
साजन के आने की झंकार होगी
मिलन चांदनी रात तारों की होगी
बेला के फूलों से सजता हुआ द्वार
खुशबू गली की हवाओं में होगी
ख़ुशी ही ख़ुशी हर तरफ दिख रही है
नए दिन के आने की आहट बनी
ये दामन ख़ुशी का हींआँगन बना है
नहीं कोई गम ज़िन्दगी में हमारे
कि वर्षों का सपना हकीकत बना है

ऐसा सुन्दर सपना अपना जीवन होगा!!

Thursday, August 17, 2017

जीवन पथ

जीवन गति मान गति बन कर
नियति के हाथ कृति बन कर
वन उपवन में संस्कृति बन कर
रातों के औस की बूंदों में
दिन को सूरज की गर्मी में
सावन की मस्त बहारो में
पतझर के झरते पत्तो में
झरने से गिरते जलप्रपात में
जीवन अनमोल गति बनकर

चलती रहती नदियों के प्रकार में
जीवन तपकर सोने सा निखरा
कुंदन बनकर संघर्षो से
है शरद ऋतू के ठिठुरन में
जीवन कंपन के अनुभव में

जीवन गति मान गति बनकर
आया वसंत ऋतू बनकर
छायी हरियाली फूलो की
पत्तो पर कोमलता छाई
जीवन भी हरा भरा होकर
है चहक रहा इन बागों में

Tuesday, August 15, 2017

आ अब लौट चले

भोर भई कुछ छंद लिखन को
मन बेचैन हुआ है
जीवन क्रम अब देर हुआ हैं
देर शाम हर घर में रौनक
सूबह-सवेरे सब सोते है
घर में पेर पसार

उलट-पुलट जीवन क्रम होता
जीवन संशय से भर जाता
चहल-पहल रातों को होती
सड़के सुनी सुबह-सवेरे
गर्म हुआ बाज़ार प्रपंच का

सूबह-सवेरे झूठ की चर्चा
सैर सपाटा सब होता हैं
हर ओर राजनीति गर्म हुई हैं
जागों-जागों देशवासी
प्रकृति की गोद में फिर से चले

प्रकृति की हमारी माँ है
हमारी सच्ची रक्षक हैं
हमारे जीवन को बदलने की धूरी
जिसके इर्द-गिर्द घुमती हैं साँसे
अब मैं थका हूँ तेरे गोद में
विश्राम करना चाहता हूँ
सब कुछ छोड़ कर थोडा वक्त
तुम्हारे साथ ही बिताना चाहता हूँ!!

Saturday, August 12, 2017

आज़ादी

स्वाधीनता की कलम से लिखेंगे
वीरों की गाथा की स्वर्णिम कहानी
हमें याद रखना हैं उनकी जुबानी
महज खानापूर्ति बने न कहानी
दीवानों की महफ़िल ने देदी आज़ादी
हमें मुस्कुराने के लायक बनाया
हमें सांस लेना भी खुल क सिखाया
उनकी जुदाई ने हमको रुलाया
वाही वीर गाथा है तुमको सुनानी
वीरों के यादों में महफ़िल सजाना
हमें मातृभूमि का वंदन हैं करना
तिलक मिट्टियों से लगाना हमें हैं
बढ़ाना हैं गौरव देश का
दिखाना राह बच्चों को
हर लाडले को बनना हैं सिपाही देश का
तिरंगा देश का गौरव
हमारे शान की जय हो
हम आज़ाद भारत में
आज मनाए मिलकर के आज़ादी के दिवानो की
यादों में कुछ मिलकर गाए
नमन सदा करते रहना हैं

अपने वीर जवानों को!